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EIS प्रशिक्षण अधूरा छोड़ने पर समस्तीपुर सिविल सर्जन पर कार्रवाई, दो वेतन वृद्धि रोकने की सजा

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | EIS प्रशिक्षण पूरा नहीं करने और बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के मामले में समस्तीपुर के सिविल सर्जन डॉ. राजीव रंजन की दो वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई।

बिहार स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 15 सितंबर 2026 को समस्तीपुर सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राजीव रंजन के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की गई है। दो वर्षीय एपिडेमिक इंटेलिजेंस सर्विसेज (EIS) प्रशिक्षण बीच में छोड़ने और प्रशिक्षण से जुड़े बॉन्ड की शर्तों का पालन नहीं करने के मामले में विभागीय जांच के बाद उनकी दो वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने की सजा दी गई है।

दो वर्षीय प्रशिक्षण के लिए हुआ था चयन

डॉ. राजीव रंजन को वर्ष 2023-25 के दौरान दो वर्षीय EIS प्रशिक्षण कार्यक्रम में नामांकित किया गया था। प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए उन्होंने एक हजार रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर गारंटी बॉन्ड भी जमा किया था।

राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के कार्यपालक निदेशक के 4 अक्टूबर 2024 के पत्र के जरिए स्वास्थ्य विभाग को जानकारी मिली कि डॉ. रंजन ने निर्धारित प्रशिक्षण बीच में ही छोड़ दिया है। विभागीय स्तर पर माना गया कि प्रशिक्षण अधूरा छोड़ने से सरकारी संसाधनों का नुकसान हुआ और राज्य को EIS कार्यक्रम के लिए तैयार होने वाले विशेषज्ञ मानव संसाधन का लाभ नहीं मिल सका।

विभागीय जांच में मुख्य आरोप साबित

मामले में स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. राजीव रंजन से स्पष्टीकरण मांगा। 12 मार्च 2025 को उन्हें आरोप पत्र भेजकर लिखित जवाब देने का अवसर दिया गया। जवाब की समीक्षा के बाद 11 जुलाई 2025 को उनके खिलाफ औपचारिक विभागीय कार्यवाही शुरू की गई।

जांच के दौरान प्रशिक्षण अवधि में असंतोषजनक व्यवहार से जुड़े आरोप को प्रमाणित नहीं माना गया। हालांकि, निर्धारित EIS प्रशिक्षण पूरा किए बिना उसे छोड़ने और बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने का मुख्य आरोप जांच अधिकारी ने प्रमाणित पाया।

पारिवारिक परिस्थितियों का दिया हवाला

अंतिम लिखित अभ्यावेदन के लिए 17 नवंबर 2025 को डॉ. रंजन से जवाब मांगा गया। अपने पक्ष में उन्होंने बताया कि 29 दिसंबर 2023 से 12 जनवरी 2024 तक उन्होंने NCDC, नई दिल्ली में ऑफलाइन प्रशिक्षण लिया था।

इसके बाद उन्हें पटना स्थित SSO में योगदान देने का निर्देश मिला। उन्होंने बताया कि 15 जनवरी से 22 अप्रैल 2024 तक NCDC के वेब पोर्टल के जरिए ऑनलाइन प्रशिक्षण जारी रखा। इसी दौरान उनकी माताजी और पत्नी की तबीयत खराब होने की बात उन्होंने विभाग को बताई।

डॉ. रंजन ने यह भी कहा कि SSO की ओर से उन्हें प्रशिक्षण के अलावा अन्य कार्यों में लगाए जाने का दबाव था।

22 अप्रैल 2024 को प्रशिक्षण से हुए मुक्त

डॉ. राजीव रंजन के अनुसार, पारिवारिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण उन्होंने NCDC से प्रशिक्षण से मुक्त करने का अनुरोध किया था। इसके बाद 22 अप्रैल 2024 को उन्हें प्रशिक्षण से मुक्त कर दिया गया।

प्रशिक्षण से मुक्त होने के बाद सिविल सर्जन समस्तीपुर के आदेश पर उन्होंने 26 अप्रैल 2024 को सदर अस्पताल में योगदान दिया। विभागीय दस्तावेज के अनुसार इसके बाद से वे लगातार सेवा में हैं।

दो वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकी गई

डॉ. रंजन के अंतिम स्पष्टीकरण और विभागीय जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद स्वास्थ्य विभाग ने माना कि EIS प्रशिक्षण पूरा नहीं करना प्रशिक्षण संबंधी एकरारनामा की शर्तों का उल्लंघन है।

इसके बाद बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमावली, 2005 के नियम-14 (5) के तहत उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई। विभाग ने डॉ. राजीव रंजन की दो वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने की शास्ति अधिरोपित की है।

असंचयात्मक प्रभाव का मतलब है कि रोकी गई वेतन वृद्धि का लाभ भविष्य की वेतन वृद्धि में स्थायी रूप से नहीं जुड़ेगा।

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